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सोमवार, 1 मार्च 2021

Types Of Punches | पंच कितने प्रकार के होते हैं.?

दोस्तों इस पोस्ट में हम लोग जानने वाले हैं Punches के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं:-

पंच (Punches) : - पंच के द्वारा हैमर की सहायता से मार्क की गई लाइनों पर बिंदु लगा दिए जाते हैं जिससे कि हुई मार्किंग जॉब बनाने के अंतिम तक दिखाई देती रहती है और इसी कारण से इसे स्थायी मार्किंग कहते हैं।

पंच के आकार :- पंच अष्टभुज आकर की होती है या फिर उसको बेलनाकार बनाकर नर्लिंग कर ली जाती है। इसके मुख्यता तीन भाग होते हैं। पहला हैड , दूसरा बॉडी और तीसरा पॉइंट। यह हाई कार्बन स्टील के बनाये जाते हैं। और इसके पॉइंट को कठोर तथा टेम्पर कर लिया जाता है।

कार्य के अनुसार पंच के प्रकार :-
(1) सेंटर पंच (Centre Punch)
(2) बिंदु पंच (Dot Punch)
(3) प्रिक पंच (Prick Punch)
(4) पिन पंच (Pin Punch)
(5) ड्रिफ्ट पंच (Drift Punch)
(6) स्वचालित पंच (Automatic Punch)
(7) बेल पंच (Bell Punch)
(8) ठोस पंच (Solid Punch)
(9) खोखली पंच (Hollow Punch)


सेंटर पंच (Centre Punch) :- यह पंच 10 मी.मी. के अष्टफलकी ढलवाँ इस्पात से लगभग 125 मि.मी. लंबा होता है। जिसके नुकीले भाग के अंतर्गत कोण 90° रखा जाता है। 

सेंटर पंच (Centre Punch) का उपयोग :- इस पंच का उपयोग धातुओं में छेद करने से पहले उस छेद के लिए केंद्र लगाने तथा गोल छड़ों को लेथ मशीन पर खरादने से पहले इनको सेंटरिंग करने के लिए इनके किनारों पर गहरे केंद्र बिंदु लगाने के लिए किया जाता है।

बिंदु पंच (Dot Punch) :- यह सेंटर पंच के लगभग बराबर होता है। यह 6 मि मी. के अष्टफलकी ढलवाँ इस्पात से बनाई जाती है। इसके बिंदु का अंतर्गत कोण 60° रखा जाता है।

बिंदु पंच (Dot Punch) का उपयोग :- इस पंच का उपयोग स्क्राइबर द्वारा खींची गई रेखाओं तथा विभाजकों द्वारा खीँचे जाने वाले वृतों के केंद्र की स्थिति अंकित करने के लिए किया जाता है।

प्रिक पंच (Prick Punch) :- इसके पॉइंट को 30° के कोण पर ग्राइंड करके बनाया जाता है। 

प्रिक पंच (Prick Punch) का उपयोग :- इसका प्रयोग मुलायम धातु , जैसे ताँबा , पीतल , अलमुनियम आदि के जॉब पर मार्क की गई लाइनों को बिंदु लगाकर स्थाई करने के लिए किया जाता है।

पिन पंच (Pin Punch) :- यह सेंटर पंच के समरूप ही होती है। परन्तु सिरे के एक बिंदु के स्थान पर यह एक चपटी गोल सतह रखती है।

पिन पंच (Pin Punch) का उपयोग :- इसका उपयोग टेपर अथवा कॉटर पिनों को छेद से निकालने के लिए किया जाता है।

ड्रिफ्ट पंच (Drift Punch) :- यह पिन पंच के समरूप ही होती है परंतु निचले सिरे पर एक चपटी, गोल, वर्गाकार या अंडाकार सतह होती है।

ड्रिफ्ट पंच (Drift Punch) का उपयोग :- इसका प्रयोग छेदों को फिनिश करने के लिए किया जाता है।

स्वचालित पंच (Automatic Punch) :- इसकी बेलनाकार बॉडी खोखली होती है तथा एक कमानी यंत्रावली रखती है जिसकी सहायता से आघात प्रदान किया जा सकता है। संक्रिया करते समय बिंदु को कार्य वस्तु के ठीक स्थान पर रखकर पंच के शीर्ष को नीचे की ओर दबाया जाता है जिससे अंदर की कमानी दबती है। कमानी के दबाब से स्ट्राइकर मुक्त हो जाता है और पंच के निचले बिंदु को आघात प्रदान करके केंद्र अंकित कराने में समर्थ हो जाता है।

स्वचालित पंच (Automatic Punch) का उपयोग :- इसका प्रयोग परिशुद्ध कार्य पर मार्किंग करने के लिए किया जाता है। इसका पॉइंट कार्य के अनुसार 60 या 90 डिग्री के कोण में हो सकता है। कैप के द्वारा हल्के निशान के लिए कैप को घूमा कर ऊपर के ओर कर दिया जाता है। अधिक गहरा निशान लगाने के लिए कैप को नीचे किया जाता है। कैप की बाहरी सतह नर्लिंग की हुई होती है व इसके अंदर स्प्रिंग होती है।

बेल पंच (Bell Punch) :- यह गोल छड़ों के केंद्र निकालने या मार्क करने के लिए प्रयोग में लाई जाती है। इसका आगे का भाग घंटी के आकार का होता है इस वजह से इसे बेल पंच के नाम से जाना जाता है।

ठोस पंच (Solid Punch) :- यह पंच शीट में सुराख करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसके द्वारा जो छेद किए जाते है वे सही साइज के नहीं होते है इसी कारण से इसका उपयोग रफ कार्यों के लिए किया जाता है।

ठोस पंच (Solid Punch) का उपयोग :- इसका प्रयोग शीट मैटल तथा ब्लैक स्मिथ में किया जाता है।

खोखली पंच (Hollow Punch) :- इसका प्रयोग मुलायम शीट में सुराख करने के लिए किया जाता है। जैसे - गत्ता, चमड़ा, गैस्केट , नरम अलौह धातु साथ ही पतली चादरों।

तो इस पोस्ट में हम लोगों ने जान लिया कि पंच कितने प्रकार के होते है और किस पंच के क्या कार्य होते है। आपको यदि हमरा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों में भी शेयर जरूर करें। साथ ही आप हमारे अन्य पोस्ट को भी जरूर पढ़ें।


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