कम्प्यूटर साइंस एवं टेक्नोलॉजी (Computer Science and Technology)

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कम्प्यूटर साइंस एवं टेक्नोलॉजी…

कम्प्यूटर का हिन्दी नाम संगणक है।

कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है। जिसका प्रथम प्रयोग 16 अगस्त, 1986 को बंगलुरू के प्रधान डाकघर में किया गया था।

भारत का प्रथम पूर्ण कम्प्यूटरीकृत डाकघर नई दिल्ली में है।

विश्व कम्प्यूटर साक्षरता दिवस प्रतिवर्ष 2 दिसम्बर को मनाया जाता है।

भारत में निर्मित पहला कम्प्यूटर सिद्धार्थ है।

भारत का पहला कम्प्यूटर इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने बनाया था जिसका स्थापना 1967 में हुई थी।

प्रथम गणना यंत्र अबेकस था, जिसका प्रयोग सबसे पहले चीन में हुआ था।

लघुगणक का आविष्कार जॉन नेपियर ने किया था।

कम्प्यूटर का जनक चालर्स बैबेज को कहा जाता है।

कम्प्यूटर की बुनियादी संरचना का विकास चालर्स बैबेज ने किया था।

सम्पूर्ण विश्व का सर्वप्रथम डिजिटल कम्प्यूटर ‘एनीयक’ (ENIAC) था, जिसे 1946 में चालु किया गया।

पंचकार्ड का आविष्कार हर्मन होलेरिथ ने किया था।

दुनिया का प्रथम प्रोग्रामर कवि वायस की बेटी एवं चालर्स बैबेज की शिष्या लेडी एडा-ऑगस्टा थी।

कम्प्यूटर विज्ञान में पी.एच.डी. करने वाले प्रथम भारतीय राजरेड्डी है।

विश्व का पहला डिजिटल कम्प्यूटर मार्क-1 तथा माइक्रो कम्प्यूटर के निर्माण का श्रेय IBM कम्पनी को है।

दुनिया की सबसे बड़ी कम्प्यूटर बनाने वाली कम्पनी IBM है।

IBM की स्थापना 1924 में हुई थी।

कोबोल (COBOL) का पूरा नाम Common Business Oriented Language है।

विश्व का प्रथम सुपर कम्प्यूटर क्रे. क्रे.-1 एस है, जिसका निर्माण का श्रेय अमेरिका के सी.आर.सी. को है।

बेसिक (BASIC) का पूरा नाम Beginners All Purpose Symbolic Code है।

मैग्नेटिक डिस्क पर ऑयरन ऑक्साइड की परत होती है।

Semi Conductor पदार्थ सिलिकॉन तथा जर्मेनियम का बना होता है।

प्रथम इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का विकास 1958 में जैक किल्बी कथा राबर्ट नोयी द्वारा किया गया था।

कम्प्यूटर में उपयोग होने वाली आईसी चिप सिलिकॉन से बनी होती है।

वैक्यूम ट्यूब्स का निर्माण प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर में हुआ था।

दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर में ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया।


तीसरी, पीढ़ी के कम्प्यूटर में ट्रांजिस्टर की जगह इंटीग्रेटेड सर्किट का प्रयोग शुरू हुआ।

माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग चौथी पीढ़ी के कम्प्यूटर में हुआ था।

भारत का सिलिकन वैली बंगलुरू में स्थित है।

उच्च स्तरीय भाषा ‘C’ का विकास चौथी पीढ़ी में हुआ।

कम्प्यूटर में जो अक्षर या संख्या टाइप करते है उसे डेटा कहते हैं।

अर्थपूर्ण डेटा को इन्फॉर्मेशन कहते है।

कम्प्यूटर में हम जो इन्फॉर्मेशन डालते है, उसे इनपुट कहते हैं।

आउटपुट, सिस्टम को दिए गए निर्देशों पर निर्भर करता है।

प्रोसेसिंग का अर्थ ‘डेटा का अर्थपूर्ण सूचनाओं मे परिवर्तन करना’ होता है।

सी.पी.यू. कम्प्यूटर का दिमाग कहलाता है।

CPU का मुख्य कार्य प्रोग्रामों को क्रियान्वित करना है।

CPU के माइक्रोप्रोसेसर पर तीन भागों का परिपथ होता है, वे हैं- CU, ALU, और Register.

माइक्रोप्रोसेसर सिलिकॉन का बना होता है।

मेमोरी और ए.एल.यू. के मध्य डाटा के आदान प्रदान को Control Unit निर्देशित करता है।

डाटा पर अंकगणितीय क्रियाएँ और तार्किक क्रियाएँ अर्थमैटिक लॉजिक यूनिट सम्पन्न करती है।

प्रोसेसर की गति को प्राय: Hz, MIPS, तथा FLOPS में मापी जाती है।

सुपर कम्प्यूटरों की गति को FLOPS में मापा जाता है।

मेनफ्रेम कम्प्यूटर में मुख्यता 32bit तथा 64bit       के माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग होता है।

माइक्रो कम्प्यूटर को पर्सनल कम्प्यूटर (PC) भी कहते है।

पहला मिनी कम्प्यूटर PDS-8 था। जिसे सन् 1965 में डी.ई.सी. ने तैयार किया था।

सुपर कम्प्यूटर सबसे शक्तिशाली और महँगा कम्प्यूटर है।

विश्व का प्रथम सुपर कम्प्यूटर “क्रे – क्रे- 1 एस” है जिसका निर्माण अमेरिका के क्रे रिसर्च कम्पनी ने 1979 में किया था।

वाहनों में प्रयुक्त स्पीडोमीटर, साधारण घड़ी, वोल्टमीटर आदि एनालॉग कम्प्यूटर के उदाहरण हैं।

एनालॉग और डिजिटल कम्प्यूटर का मिश्रित रूप हाइब्रिड कम्प्यूटर कहलाता है।

भारत के पास एक ही सुपर कम्प्यूटर है, जिसका नाम परम है।

सिद्धार्थ भारत में निर्मित पहला पर्सनल कम्प्यूटर है।

विश्व का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर IBM का Rodernor है।

भारत तथा एशिया का सबसे तेज सुपर कम्प्यूटर एका है।

PC का विकास 1970 ई. में माइक्रो प्रोसेसर 8086 का प्रयोग करके किया गया।

PC का महत्वपूर्ण इनपुट डिवाइस Key-Board तथा Mouse है।

Mouse को प्वाइंटिंग डिवाइस भी कहा जाता है।

Key-Board के Layout को Owerty कहते है।

मॉनीटर को विजुअल डिस्पले यूनिट या VDU भी कहते हैं।

Printer तथा Monitor एक Output Device है।

keyboard तथा mouse प्रमुख इनपुट डिवाइस है।

Mouse को प्वाइटिंग डिवाइस भी कहा जाता है।

Monitor तथा Printer एक प्रमुख Output डिवाइस है।

MICR तकनीक में चेक पर विशेष चुम्बकीय स्याही द्वारा कैरेक्टर छपे रहते हैं।

माउस का आविष्कार 1977 में डगलस सी इंडोल्वर्ट ने किया था।

MICR का पूरा नाम Magnetic Ink Character Recognition होता है।

माउस का उपयोग मुख्यता ग्राफिक्स यूजर इंटरफेस (GUI) आधारित कार्यों में किया जाता है।

फंक्शन कुंजियाँ ऐसी कुंजियाँ है, जिसमें पहले से आदेश भरे होते हैं।

कागज पर प्राप्त आउटपुट हार्ड कॉपी (Hard Copy) कहलाता है।

CRT का पूरा नाम Cathode Ray Tube होता है।

LCD का पूरा नाम Liquid Crystal Display होता है।

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटरों द्वारा छपाई बिन्दुओं के माध्यम से की जाती है।

VDU का पूरा नाम Visual Display Unit होता है।

कम्प्यूटर की भौतिक संरचना जिसे हम छू या देख सकते है, हार्डवेयर कहलाता है।

कम्प्यूटर प्रोग्राम के समूह को सॉफ्टवेयर कहा जाता है।

वर्ड स्टार, वर्ड पैड, तथा एम. एस. वर्ड को वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर के नाम से जाना जाता है।

ऐसे प्रोग्राम जो कम्प्यूटर सिस्टम और इसके विभिन्न भागों का रख रखाव और उनकी मरम्मत करते हैं, यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कहलाते हैं।

ऐसे अनेक प्रोग्रामों के समूह जो एक निश्चित कार्य को कर सकते हैं, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कहलाते हैं।

ऐसे प्रोग्रामों का समूह जो कम्प्यूटर सिस्टम के क्रियाओं को नियंत्रित करता हैं, सिस्टम सॉफ्टवेयर कहलाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम एक मास्टर कंट्रोल प्रोग्राम होता है, जो कम्प्यूटर हार्डवेयर एवं यूजर के बीच एक संयोजन कड़ी का कार्य करता है।

यूनिक्स “C” भाषा में लिखा गया है।

कम्प्यूटर के ऑन होने के बाद ऑपरेटिंग सिस्टम सबसे पहले मेमोरी में संगृहीत होता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के महत्वपूर्ण कार्य है- नियंत्रण तथा प्रबंधन।

डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक परिपथ का मुख्य भाग ट्रांजिस्टर होता है।

ट्रांजिस्टर दो अवस्थाओं में कार्य करता है- On एवं Off

0 और 1 को बाइनरी नम्बर कहते है।

1 का तात्पर्य On तथा 0 का तात्पर्य Off होता है।

कम्प्यूटर में डाटा को व्यक्त करने वाली प्रणाली Binary Number System कहलाती है।

इंटरनेट कम्प्यूटर नेटवर्क का विश्वव्यापी सिस्टम है, जिसे नेटवर्कों का नेट भी कहते हैं।

इंटरनेट का पूरा नाम इंटरनेश्नल नेटवर्क है।

इंटरनेट सेवा का आरंभ सन् 1969 को अमेरिका रक्षा विभाग द्वारा अर्पानेट (ARPANET) द्वारा किया गया।

भारत में इंटरनेट सेवा का आरंभ 15 Aug, 1995 को किया गया।

वल्ड वाइड वेब (WWW) का विकास टिम बर्नर्सली ने 1989 में किया।

वल्ड वाइड वेब HTTP प्रोटोकॉल का प्रयोग करता है।

वल्ड वाइड वेब का प्रत्येक पृष्ठ वेब पेज कहलाता है।

वेब साइट वेब पेजेज का कलेक्शन होता है।

किसी भी वेब साइट का प्रथम पृष्ट होम पेज कहलाता है।

वेबसाइट एड्रेस एक यूनीक नाम होता है जो वेब पर एक विशिष्ट वेब साइट को आइडेंटिफाई करता है।

वेब पेज तैयार करने के लिऐ HTML भाषा का प्रयोग किया जाता है।

HTML डाक्यूमेंट बनाने के लिऐ टेक्स्ट एडिटर की जरूरत होती है।

मॉडेम का पूर्ण रूप मॉडुलेटर डिमॉडुलेटर है।

विभिन्न पेजों का वेब ब्राउजर से देखना ब्राउजिंग या नेटसर्फिंग कहलाता है।

कुछ कॉमन सोशल नेटवर्किंग साइट हैं- फेसबुक, माई स्पेस, ऑरकुट, ईबीबी, आदि।

ब्राउजिंग के लिए प्रयोग होने वाला सबसे अधिक प्रचलित सॉफ्टवेयर इंटरनेट एक्सप्लोरर है।


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